Breaking

Monday, August 24, 2020

जनसंख्या पर निबंध | Essay on Population in Hindi

आज के समय मे बढ़ती हुई जनसंख्या एक गम्भीर समस्या बनती जा रही है, जो कि आने वाले समय में और भी गम्भीर होती जाएगी, विश्व के लगभग हर एक देश में जनसंख्या बढ़ती ही जा रही है, और ये जनसंख्या हमें हर एक स्थान पर भीड़ के रूप मे नज़र आती है। आज हम जनसंख्या जैसी भयावह स्थिति को समझाने, उससे अवगत कराने और इसका निपटान करने हेतु हम आपके समक्ष जनसंख्या पर निबंध लेकर उपस्थित हुए है।

जनसंख्या पर निबंध | Essay on Population in Hindi


Essay on Population in Hindi, Population Par Essay, Jansankhya Par Lekh, जनसंख्या पर निबंध
Essay on Population in Hindi

Essay on Population in Hindi in 200 Words


विश्व में किसी भी देश के लिए उसकी 'जनसंख्या' बहुत महत्व रखती है, देश की जनसंख्या के आधार पर ही एक देश को विश्व में नंबरो पर रखा जाता। विश्व भर में जनसंख्या के आधार पर हमारे देश का स्थान नंबर 2 पर है। साल 2020 के मौज़ूदा हालातों के अनुसार भारत की जनसंख्या एक सौ अड़तीस करोड़ के आस-पास होने का अनुमान है। जो कि चीन की जनसंख्या से लगभग पाँच करोड़ कम है, चीन जनसंख्या के आधार पर पहले स्थान पर है।

भारत की जनसंख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है, जिसके बहुत से कारण है, जैसे कि,
(1)सरकार द्वारा जनसंख्या को लेकर कड़क कानून जारी करने में देरी।
(2) लोगों को परिवार नियोजन कार्यक्रम की जानकारी ना होना।
(3) लोगों का सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों को सख्ती से ना लेना।

ये मुख्य कारण है इनके आलावा और भी कारण होते है जिनके कारण जनसंख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। बढ़ती जनसंख्या के कारण देश में बेरोजगारी बढ रही है, बढ़ती जनसंख्या के कारण ही वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। भारत देश की जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या में 17.70% शेयर है। भारत की जनसंख्या का 35% भाग शहरों मे निवास करता और बाकी का 65% गाँवो में निवास करता ।


जनसंख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है, हम यह भी कह सकते है कि जन्म-दर मृत्यु-दर की अपेक्षा ज्यादा हो रहा है और आज जनसंख्या को बढ़ता देख ये कहना गलत भी नही होगा। जनसंख्या के आधार पर ही सब देशों की आर्थिक स्थिति निर्भर करती है, और जनसंख्या के आधार पर ही देशों को विश्व में स्थान भी दिए जाते, जिस देश की जनसंख्या ज्यादा बढ़ रही है, वो देश निरन्तर ही जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाते रहते है और समय समय पर उन्हें लागू भी करते है।


जनसंख्या पर निबंध 400 शब्दों में


आज के समय में हम कही भी चले जाए, वहा ही हमे भीड़ मिलती है, चाहे वो स्थान कोई रेस्टोरेन्ट, कोई रेलवे स्टेशन या बस स्टैण्ड, पार्क, मार्किट, इत्यादि, सब जगहो पर ही भीड होती है, जहा तक कि मन्दिर, मस्जिद और सभी धार्मिको स्थानो पर भी भीड बहुत ज्यादा रहती है।और इसका कारण है जनसंख्या का तेजी से बढ़ना है।

जनसंख्याः जनसंख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है, हम रह भी कह सकते है कि जन्म दर मृत्यु दर की अपेक्षा ज्यादा हो रहा है। और आज जनसंख्या को बढ़ता देख ये कहना गलत भी नही होगा। जनसंख्या के आधार पर ही सब देशो की आर्थिक स्थिति निर्भर करती है,और जनसंख्या के आधार पर भी देशो को विश्व मे स्थान भी दिए जाते, जिस देश की जनसंख्या ज्यादा बढ़ रही है, वो देश निरन्तर ही जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाते रहते और समय समय पर उन्हें लागू भी करते।

बढ़ती जनसंख्या के दुष्प्रभाव:
1) बेरोजगारी बढ़ती जा रही,
2) प्रदूषण बढ़ रहा,
3) संसाधनो मे कमी आना, इत्यादि।

बढ़ती जनसंख्या को रोकने  के उपाएः
1) लोगों की सही जानकारी देना।
2) जनसंख्या को गम्भीरता से लेते हुए सख्त कानून बनाना।
3) लोगों को सैक्स (sex) के प्रति जागरूक करना।

ऐसा नही भारत सरकार द्वारा जनसंख्या कम करने का कार्य ना किया गया हो, भारत सरकार ने समय समय पर जनसंख्या को रोकने के लिए बहुत से कानून पास किए, लोगों से बच्चों के जन्म में अन्तर रखने को कहा, लोगों को सैक्स सबंधित ज्ञान दिया गया, पुरुषों को नसबंदी के लिए कहा गया, फिर भी भारत की जनसंख्या अन्य देशों के मुकाबले बहुत ज्यादा है।

विश्व की जनसंख्याः विश्व की जनसंख्या लगभग 7 अरब 80 करोड के करीब है। भारत का स्थान जनसंख्या के आधार पर विश्व में दूसरे स्थान पर है, और भारत की जनसंख्या लगभग 1,380,004,385 है, जो कि निरन्तर बढ़ रही है, साल 2010 से 2019 तक लगातार भारत की जनसंख्या मे 1.2 प्रतिशत इजा़फा हुआ है, और अगर ऐसा ही चलता रहा तो भारत आने वाले कुछ ही सालों में चीन को पीछे छोड़ पहले स्थान पर आ जाएगा, जो कि सभी के लिए एक चिन्ताजनक बात है और विचार करने वाली भी, कि कैसे जनसंख्या को नियंत्रण किया जाए, कौन सा ऐसा कानून लाया जाए, जिससे जनसंख्या को बढ़ने से रोका जा सके।

Population Par Essay in 1000 Words


जनसंख्या किसी एक विशेष स्थान पर रहने वाले लोगों की संख्या को कहते हैं। विभिन्न स्थानों पर भिन्न भिन्न जनसंख्या होती है। कई कारणों के कारण कहीं पर जनसंख्या ज़्यादा तो कहीं पर कम है। कई देशों में जनसंख्या अत्याधिक तेजी से बढ़ती जा रही है। वहाँ पर जनसंख्या नियंत्रण के लिए कई उपाय भी किए जा रहे हैं। जैसे :- बंध्याकरण, एकल शिशु नीति वा दो शिशु नीति, परिवार नियोजन इत्यादि। जनसंख्या की दृष्टि से देखा जाए तो चाइना प्रथम स्थान पर है तथा भारत दूसरे स्थान पर।पूरे विश्व में जनसंख्या हर साल लगभग 8.3 करोड़ या 1.1 % की दर से बढ़ रही है। अब जनसंख्या नियंत्रण करना अति आवश्यक है। यदि जनसंख्या को जल्द से जल्द नियंत्रित नहीं किया गया तो यह जनसंख्या विस्फोट का कारण बन सकता है।

जनसंख्या वृद्धि के कारण- जनसंख्या वृद्धि के कई कारण हैं। परंतु जनसंख्या वृद्धि के मूल कारण गरीबी तथा अशिक्षा है, और कारण निम्न हैं - अल्प आयु विवाह एवं सार्वभौमिक विवाह, रूढ़िवादी सोच, अवैध प्रवासी एवं कम मृत्युदर ये कुछ जनसंख्या वृद्धि के मूल कारण हैं।

1) गरीबी तथा अशिक्षा :- गरीबी तथा अशिक्षा ही जनसंख्या वृद्धि का बहुत बड़ा कारण है। गरीब लोगों की सोच कुछ अलग होती है, वे ये सोचते हैं कि जितने ज़्यादा लोग होंगे, उतने ही कमाने वाले होंगे और उतनी ही आय बढ़ेगी, परंतु अशिक्षा के कारण वे ये नहीं समझते हैं कि ज्यादा लोग होने से बेरोजगारी बढ़ेगी और अशिक्षित होने के कारण वे कृत्रिम साधनों से अनभिज्ञ भी होते हैं।

2) अल्प आयु विवाह :- वैसे तो विवाह की आयु 18 वर्ष कानूनी तौर पर निर्धारित की गई है, परंतु हमारे देश में प्राचीन काल से ही लड़कियों का अल्प आयु विवाह कराने की रीति है। जिसके कारण गर्भ धारण की अवधि बढ़ जाती है, जिससे जनसंख्या वृद्धि होती है।

3) रूढ़िवादी सोच :- लोगों का सोचना है कि केवल लड़के ही कमा सकते हैं और इसी बेकार पुरानी सोच के कारण लोग ज्यादा से ज्यादा बच्चे कर लेते हैं कि जितने ज़्यादा लड़के होंगे उतनी ही ज्यादा आय होगी।

4) अवैध प्रवासी :- अन्त में हम प्रवासियों को भी एक जनसंख्या वृद्धि का कारण कह सकते हैं क्युकि हम बांग्लादेश व नेपाल से आए हुए अवैध प्रवासियों को भी अनदेखा नहीं कर सकते।

5) कम मत्युदर :- आजकल के आधुनिक समय में मत्युदर कम होती जा रही है क्युकि सुविधायें इतनी बढ़ गई हैं कि लोगों की मत्यु कम ही होती है। यह अच्छा भी है कि सुविधायें बढ़ रही हैं परंतु ये हमारे जनसंख्या वृद्धि में एक बड़ा कारण बन गया है।

जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम- अब जनसंख्या वृद्धि के कारण कई समस्याएँ उत्पन्न होने लगी हैं। हमारी आवश्यकताएं बढ़ रही हैं और उत्पादन कम होता जा रहा है। आज बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बन चुकी है और इसी की तरह कई और समस्याएँ जैसे बुनियादी ढांचे पर प्रभाव, मूल आवश्यकताओं की कमी, घटता उत्पादन और बढ़ती लागत, अनुचित आय वितरण, पर्यावरण को क्षति आदि जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम के रूप में सामने आ रहे हैं।

1) बेरोजगारी :- बढ़ती बेरोजगारी आज कल की सबसे बड़ी समस्या बन गयी है। आजकल जनसंख्या के बढ़ते दौर में रोजगार उत्पन्न करना बहुत मुश्किल हो गया है। अशिक्षित लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है और जो लोग शिक्षित हैं वो कोई छोटा काम करना नहीं चाहते उनको भी बड़ा रोजगार चाहिए। कई बार रोजगार ना पाने के कारण लोगों की मानसिक स्थिति भी विकट हो जाती है और लोग कई बार समाज के दबाव में आकर गलत कदम उठा लेते हैं।

2) बुनियादी ढांचे पर प्रभाव :- हमारा देश एक विकास-शील देश है। हमारा देश अभी इतना विकसित नहीं है जिसके कारण हमारे देश में जितनी सुविधाएँ हैं उसमे कमी आती जा रही है, ये सुविधायें इतनी बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए पर्याप्त नहीं है। जिससे कारण आर्थिक मंदी और व्यापार प्रसार में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। जिससे हमारे संसाधनों में भी कमी आ रही है। परिवहन, संचार, आवास, शिक्षा- संसाधन, अस्पताल जैसी कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। जिसके परिणामस्वरूप झोपड़पट्टियां, ट्राफिक, बीमारियां आदि बहुत तेजी से बढ़ रही हैं।

3) मूल आवश्यकताओं की कमी :- सभी जानते हैं कि मनुष्य की मूल आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान है। लेकिन आज इसी की सबसे ज्यादा कमी बढ़ती जा रही है। रोजगार ना मिल पाने के कारण लोग अपना वा अपने परिवार का पेट नहीं पाल पाते हैं जिसके कारण चोरियां, डकैती आदि बढ़ जाती हैं।

4) घटता उत्पादन एवं बढ़ती लागत :- हमारी जनसंख्या बढ़ रही है तो जाहिर है कि आवश्यकताएं भी बढ़ेंगी ही। परंतु संसाधन ना हो पाने के कारण उत्पादन कम हो रहा है जिससे सभी को पर्याप्त भोजन या और आवश्यक वस्तुएँ नहीं मिल पाती हैं और उत्पादन घट गई है जिसके कारण लागत बढ़ती जा रही है और बढ़ती महंगाई के कारण भी कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

5) अनुचित आय वितरण :- पर्याप्त रोजगार ना होने के कारण एक ही कार्यालय में कई लोगों की भर्ती भी हो जाती है जिससे लोगों की आय में फर्क़ आ जाता है और लोगों को उनके कार्यानुसार वेतन नहीं प्राप्त हो पाता है जिससे कई बार धरना-प्रदर्शन, दंगे आदि भी हो जाते हैं।

6) पर्यावरण को क्षति :- हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हम पर्यावरण को क्षति पहुंचाते हैं। जाने-अनजाने जो कुछ भी हम अपने पर्यावरण को क्षति पहुँचाते हैं उससे हम हीं को नुकसान होता है। हमें पर्यावरण के नियमों के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए। नहीं तो हमें आगे चलकर बहुत बड़ी आपदा का सामना करना पड़ सकता है।

जनसंख्या वृद्धि को रोकने के उपाय- सर्वप्रथम हमें इसे रोकने के लिए शिक्षा का प्रसार करना होगा। और भी कई उपायों से हम जनसंख्या नियंत्रित कर सकते हैं जैसे :- जनसंख्या शिक्षा (परिवार नियोजन संबंधी शिक्षा, महिला शिक्षा, यौन शिक्षा), विवाह की आयु में वृद्धि, जन संपर्क, संतानोत्पत्ति की सीमा निर्धारण, स्वास्थ्य तथा मनोरंजन सेवा के प्रबंध, सामाजिक सुरक्षा, शिशु मृत्युदर कम करना, कृत्रिम साधनों का उपयोग आदि के द्वारा हम जनसंख्या वृद्धि को कम कर सकते हैं।

1) शिक्षा का प्रसार :- हमारे देश की 70% आबादी गांव में रहती है जिसमें से बहुत कम ही लोग ऐसे होंगे जो शिक्षा का मह्त्व समझते हैं। बाकी अधिकतर लोग अशिक्षित होते हैं। इसी अशिक्षा के कारण बेरोजगारी, गरीबी, महँगाई जैसी समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। जिससे हमारे देश में कयी सारी परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं। इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए हमे शिक्षा का क्षेत्र बढ़ाना होगा और जन-जन को शिक्षित करना होगा तभी लोग इस बढ़ती हुई जनसंख्या से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को समझेंगे और उससे जुड़ी बातों को जानने के लिए जागरूक होंगे।

2) जनसंख्या शिक्षा :- जनसंख्या शिक्षा के अंतर्गत परिवार-नियोजन शिक्षा, महिला शिक्षा, यौन शिक्षा आदि आ जाती है। इसके द्वारा हम लोगों को जनसंख्या संबंधी शिक्षा देकर युवाओं को जागरूक कर सकते हैं। इस तरह के कार्यक्रम सरकार या स्वयं सेवी संघ द्वारा चलाए जाते हैं जिसमें युवाओं को विवाह की सही उम्र, खान- पान, दुष्परिणाम, परिवार नियोजन आदि की शिक्षा दी जाती है। यदि हमारी आज की पीढ़ी (युवा) जागरूक होगा तो हम इस समस्या का समाधान निकाल सकते हैं।

3) विवाह की आयु में वृद्धि :- वैसे तो कानूनी तौर पर विवाह की उम्र 18 वर्ष है परंतु लोग अपनी पुरानी सोच के चलते ल़डकियों का विवाह कम उम्र में ही करवा देते हैं। लेकिन हमें तब तक ल़डकियों की शादी नहीं करानी चाहिए जब तक वे अपने पैरों पर खाड़ी ना हो जायें (अर्थात आत्मनिर्भर ना हो जाए) जितनी ज्यादा उम्र पर विवाह होगा संतान उत्पत्ति की अवधि उतनी ही कम होगी, जिससे भी जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

4) जन संपर्क :- कई सारी ऐसी संस्थायें हैं जो गाँव-गाँव जाकर लोगों से बातचीत करके उनको जनसंख्या वृद्धि से होने वाली समस्याओ के बारे में तथा उनके निदान के बारे में बताती हैं या फिर वे नाटक, किसी प्रकार के कार्यक्रम के द्वारा लोगों को जागरूक करते हैं। जितने ज्यादा लोग जागरूक होंगे उतनी ही हमे जनसंख्या वृद्धि को रोकने में सहायता मिलेगी।

5) संतानोत्पत्ति की सीमा निर्धारण :- सरकार द्वारा संतानोत्पत्ति की सीमा 2 बच्चों तक निर्धारित की गई है। क्युकि छोटा परिवार सुखी परिवार। जब लोग इसका पालन करना शुरू करेंगे तब जनसंख्या वृद्धि को रोकने में बहुत सहायता होगी।

6) स्वास्थ्य तथा मनोरंजन सेवा के प्रबंध :- सभी जगहों पर सफाई तथा स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं का ध्यान रखना चाहिए। गाँव में अस्पताल, नर्स, आशा आदि की सही व्यवस्था होनी चाहिए। जिससे स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों का निवारण असानी से हो जाए। मनोरंजन की भी सही व्यवस्था होनी चाहिए क्युकि कयी स्थानो पर मनोरंजन के नाम पर ल़डकियों वा औरतों का शोषण होता है। और ये भी ध्यान देना चाहिए कि स्त्री पुरुष का एकमात्र मनोरंजन का साधन ना बनें।

7) सामाजिक सुरक्षा :- हमारे यहां वृद्धावस्था, बेकारी तथा दुर्घटनाओं से बचने के बहुत कम उपाय हैं जिससे कारण लोग बड़े परिवार की इच्छा रखते हैं। यदि देश में वृद्धाश्रम, बेरोजगार भत्ता, दुर्घटना होने पर इलाज, पेंशन आदि की व्यवस्था की जाए तो लोगों के मन से डर दूर होगा और वे छोटे परिवार के बारे में सोचेंगे और उसे सुरक्षित महसूस करेंगे।

8) शिशु मृत्यु दर कम करना :- शिशु मृत्युदर को कम करने से लोगों के मन से डर (जन्म के दौरान या पहले मृत्यु होने का डर) खत्म होगा और लोग कम संतान उत्पन्न करेंगे। शिशु मृत्युदर कम करने के लिए अस्पतालों में उचित वयवस्था करनी चाहिए ।

9) कृत्रिम साधनों का उपयोग :- लोगों को कृत्रिम साधनों का उपयोग करने के लिए जागरूक करना होगा और उन्हें इसका उपयोग वा यह बताना होगा कि ये सुरक्षित हैं और इससे क्या फायदा है। यदि हम सभी नियमों वा उपायों का पालन करते हैं तो हम बहुत जल्द जनसंख्या वृद्धि रोकने में सफल होंगे।

उपसंहार- इस प्रकार हम देखते हैं कि जनसंख्या की वृद्धि हमारे देश के लिए एक बड़ी समस्या बन गयी है। यदि जल्द से जल्द कोई उपाय नहीं किया गया तो जनसंख्या विस्फोट होने के बहुत ही जल्द आसार बन जाएंगे और संसाधनो की कमी के कारण भी कई समस्याएं उत्पन्न हो जाएंगी।

हमें आशा है कि आप सबको यह Essay on Population in Hindi अवश्य पसंद आया होगा, हमने यह लेख बहुत ही सरल भाषा उपयोग कर आपके समक्ष प्रस्तुत किया है ताकि हमारे विद्यार्थीगण व अन्य पाठक इसको आसानी से समझ सकें। अगर आपको यह अच्छा लगा हो तो इसे शेयर अवश्य करदें, हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध सोशल मीडिया आइकॉन के जरिये।

1 comment: