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Saturday, August 22, 2020

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर जीवनी | Biography of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi

डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन के नाम से भला कौन नही परिचित होगा ? हमारे देश का हर बच्चा, बूढ़ा व नौजवान उनके नाम से परिचित है। वे एक प्रसिद्ध शिक्षाविद और महान विचारक थे। इन्होंने भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति के पद को भी सुशोभित किया। सन 1954 में इनको भारत सरकार की तरफ से भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया।

आज हम एक महान व्यक्ति और निष्ठावान पुरुष की जीवन गाथा और उनके विचारों पर रौशनी प्रकट करते हुए आपके समक्ष शेयर है डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर जीवनी। यह जीवनी हमारे विद्यार्थी जनों व अन्य पाठकों को डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के विचारों व योगदानों को समझने में सहायता प्रदान करेगी।

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर जीवनी | Biography of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi


Biography of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर जीवनी
Biography of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi

Biography of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi


जीवन परिचय

इनका जन्म 5 सितंबर, सन 1888 में, दक्षिण भारत में स्थित तमिलनाडु राज्य के तिरुतनी नामक ग्राम में हुआ था । इनके पिता का नाम 'सर्वपल्ली वीरास्वामी' और माता का नाम 'सिताम्मा' था। इनकी पत्नी का नाम 'सिवाकमु' था। कहा जाता है कि इनके पुरखे पहले कभी 'सर्वपल्ली' नाम के गांव में रहते थे, इसलिए वे चाहते थे कि उनका जन्मस्थल ग्राम का बोध बना रहे इस कारण इनके परिवार के सभी परिजन अपने नाम के पूर्व 'सर्वपल्ली' धारण करने लगे थे। इनकी मृत्यु 17 अप्रैल 1975 को चैन्नई में हुई।

शिक्षा-दीक्षा

डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी बचपन से ही किताबे पढ़ने के शौक़ीन थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा क्रिस्चियन मिशनरी संस्था लुथर्न मिशन स्कूल तिरुपति में हुई। फिर उसके बाद अगले 4 वर्ष की शिक्षा बेलरू में हुई। इसके बाद इन्हें उच्च शिक्षा के लिए मद्रास क्रिस्चियन कॉलेज मद्रास भेजा गया। वे बचपन से ही मेधावी छात्र थे। उन्होंने अपने अध्धयन काल में ही स्वामी विवेकानंद जैसे विचारकों और बाइबिल का अध्ययन कर लिया था। उन्होंने जब मैट्रिक की परीक्षा पास की थी तो इन्हें छात्रवृति भी मिली थी। इन्होंने दर्शनशास्त्र में एम० ए० किया था। इसके बाद वे मद्रास में स्थित मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक के पद पर नियुक्त हुए।

शिक्षा में योगदान

डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का शिक्षा में काफी योगदान रहा। उनके व्यक्तित्व में उच्च गुणों का समावेश था। उनका मानना था कि शिक्षा के द्वारा ही हम समाज में परिवर्तन ला सकते है। इन्होंने भारत देश की शिक्षा को एक नई दिशा प्रदान की। वे समस्त विश्व को एक सूत्र में पिरा हुआ देखना चाहते थे। इन्होंने कई  पुस्तकें लिखी है जो सम्पूर्ण विश्व को भारत की गौरवशाली गाथा का ज्ञान कराती है। वे सम्पूर्ण भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत्र थे। लोग इनको अपना आदर्श मानते थे। प्रतिवर्ष लोग इनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं।

इनके द्वारा रचित प्रसिद्ध हिंदी पुस्तकें

  • सत्य की खोज
  • भारतीय दर्शन का इतिहास
  • भारत और चीन
  • स्वतंत्रता और संस्कृति
  • आज का भारतीय साहित्य
  • गांधी श्रधांजलि -ग्रंथ, आदि।
  • स्वतंत्रता और संस्कृति
  • गाँधी अभिनंदन
  • जीवन की आध्यात्मिक दृष्टि
  • भारत में आर्थिक नियोजन

इनके द्वारा रचित प्रसिद्ध अंग्रेज़ी पुस्तकें

  • द ब्रह्म सूत्र: द फिलोसॉफी ऑफ स्पिरिचुअल लाइफ
  • द भगवदगीता (ट्रांसलेटेड)
  • द फिलॉसोफी ऑफ़ हिंदूइस्म
  • लिविंग विध अ पर्पस
  • द परसूट ऑफ़ ट्रुथ
  • इंडियन फिलोसॉफी

राजनीतिक जीवन और देश के प्रति योगदान

देश के पहले उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को पूरा देश शिक्षक दिवस के रूप में मनाता है। उनके शिक्षा के प्रति विचार और आचरण की सार्थकता को देखते हुए ही 5 सितंबर को शिक्षक दिवस घोषित किया गया था। पहला भारत रत्न का सम्मान भी डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को 1954 में प्रदान किया गया। आइए जानते हैं ऐसे क्या कारण रहे, जिसके चलते यह सम्मान पाने वाले राधाकृष्णन पहले व्यक्ति बने।

स्वतंत्रता के बाद भी डॉ. राधाकृष्णन ने अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। यूनेस्को की कार्यसमि‍ति के अध्यक्ष भी बनाए गए। यह संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ का एक अंग है। सन् 1949 से सन् 1952 तक डॉ. राधाकृष्णन रूस की राजधानी मास्को में भारत के राजदूत पद पर रहे। भारत रूस की मित्रता बढ़ाने में उनका भारी योगदान रहा था। साल 1952 में वे भारत के उपराष्ट्रपति बनाए गए। इस महान दार्शनिक शिक्षाविद और लेखक को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने देश का सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न प्रदान किया।

दार्शनिक होने के कारण डा. राधाकृष्णन ने शिक्षा को शाश्वत जीवन की प्राप्ति के साधन रूप में परिभाषित किया है। उनके अनुसार शिक्षा का स्वरुप विस्तृत होना ही आज की आवश्यकता नहीं है वरन् उसमें गहराई तथा गहनता का होना भी आवश्यक है जिससे बालकों की वाधित मानसिक शक्तियों का विकास किया जा सके।

देश के निष्ठावान व ऊर्जावान व्यक्ति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी अपने महान कार्य के लिए हमेशा जाने जाते थे और हमेशा जाने जाते रहेंगे। देश में सर्वोच्च दर्जा रखने वाले डॉ. जी हमारे बीच न होते हुए भी, अपने कार्य से सदा जाने जाते रहेंगे और हम भी उनको सदा याद रहेंगे। हमें आशा है कि आपको यह Biography of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi अवश्य पसंद आयी होगी। हमने इसे बहुत ही सरल भाषा उपयोग कर प्रस्तुत किया है, ताकि हमारे पाठकों को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।


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