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Friday, September 18, 2020

दोस्ती पर निबंध | Essay on Friendship in Hindi

दोस्ती वह भावना होती है जो दो दोस्तों के विचारों, भावनाओं, आपसी प्यार और ह्रदय को जोड़ती है। एक सच्चा निःस्वार्थ मित्र पूरी ज़िंदगी भर साथ निभाता है, चाहें दुःख हो या सुख या हो कोई मुसीबत, हमारा साथ कभी नही छोड़ता। वह अपने मित्र को हमेशा उचित कार्य करने की सलाह देता है। लेकिन वर्तमान युग में सच्चे मित्र को ढूँढ पाना बेहद मुश्किल सा हो गया है।

आज हम आपके समक्ष शेयर करते है दोस्ती पर निबंध जिससे कि हमारे सभी विद्यार्थी गणों और अन्य पाठकों को अपने मित्र को ढूढ़ने में कोई कठिनाई न हो। यह लेख हमने बहुत ही उचित भाषा उपयोग कर लिखा है, जिससे कि आप को पढ़ने में कोई कठिनाई न हो।

फ्रेंडशिप पर निबंध | Essay on Friendship in Hindi


Essay on Friendship in Hindi
Essay on Friendship in Hindi

Essay on Friendship in Hindi in 200 Words


दोस्ती में कभी भी जात-पात, ऊंच-नीच, उम्र, रंग कभी भी नही देखा जाता है। दोस्ती में बस दिल को देखा जाता है और दोस्ती की जाती है। दोस्ती के कोई रूल-कोई असूल नही होते है। दोस्ती ही तो एक ऐसा रिश्ता होता है, जो दो अन्जान लोगों को एक बना देता है। दोस्ती का रिश्ता हमेशा सर्वोच्च माना गया है, क्योंकि जिन्दगी में हमारे सब रिश्ते तय आते है, लेकिन एक दोस्त ही होता जिसे हम अपनी जिन्दगी में स्वयं बनाते है, और उससे दोस्ती निभाते है, और वो भी हमसे दोस्ती निभाता है।

दोस्ती में कभी अमीरी और गरीबी नही देखी जाती इसका उदाहरण सदैव ही श्री कृष्ण जी ने दिया था जिन्होंने अपने बचपन के दोस्त सुदामा को अपने राज्य वासियों के सामने गले लगाया था, और दोस्ती को अमर कर दिया था। दोस्ती में कभी ये भी नही देखा जाता कि आप का अच्छा दोस्त एक लड़का है या लड़की बस वो आपको और आपकी दोस्ती को समझता हो। दोस्ती एक एहसास होता है, जिसे एक सच्चा दोस्त ही समझ पाता है, दोस्ती में कभी रंग और रूप भी नही देखा जाता है, जरूरी नही हम काले रंग के है तो हमें गौरे रंग के लोग अपना दोस्त नही बनाऐंगे, दोस्ती एक विश्वास है, जिस पर ही हर एक रिश्ता टिका होता है। दोस्ती का रिश्ता एक सच्चाई है और प्यार पर निर्भर करता है।

दोस्ती में कभी कभी छोटी छोटी बातों को लेकर अक्सर दोस्तों में अनबन हो जाती है, कुछ समय के लिए बात ना करना, एक दूसरे को देखकर मुँह फेर लेना, मैसेज तक को ना देखना ये सब चलता रहता है, लेकिन एक सच्चे दोस्त ऐसा नहीं करते। दोस्त की खुशी में ही दूसरे दोस्त की खुशी होती है, ये बात दोनों दोस्तो को समझनी चाहिए, दोस्त अगर बनाने से पहले नही सोचते तो जब उस दोस्त से एक गलती हो जाती है तो उसे हम एक पल में कैसे बेगाना कर देते है, हमें दोस्ती और दोस्त की अहमयित को समझना चाहिए, दोस्ती के लिए कुछ लोग अपनी जान तक भी दे देते है, दोस्ती वही सच्ची होती है, जहा प्यार के साथ तकरार भी रहे लेकिन इतनी भी नही की दोनों दोस्त अलग हो जाए। दोस्ती का रिश्ता आकाश की भांति ऊँचा, समुद्र की भांति गहरा, गंगा के समान पवित्र और शहद के समान मीठा होता है ।

फ्रेंडशिप पर निबंध 400 शब्दों में


दोस्ती का रिश्ता बहुत ही अनमोल होता है। ये कहे कि संसार में दोस्ती के रिश्ते जैसा कोई पवित्र रिश्ता नही होता तो अतिशयोक्ति न होगी। संसार में दोस्ती के हमें कई उदाहरण मिलते है, जिसमें मित्रता के नए आयाम प्रस्तुत किये गए है। उनमें सबसे प्रसिद्ध उदाहरण श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती का है, जिसमें कृष्णा ने अपने मित्र सुदामा के चरणों को अपने आँसुओं से धुला था और अपने मित्र को धन-धान्य सभी कुछ दे दिया था। सभी रिश्तों में दोस्ती ही एक रिश्ता होती है जो निस्वार्थ भाव से निभाई जाती है। सच्ची दोस्ती उच्च-नीच, अमीरी-गरीबी नही देखती, वो तो केवल मित्रता का भाव देखती है। वैसे तो दुनिया में मित्रता के कई रूप होते है, लेकिन सच्ची मित्रता वो होती है जो आपके मुसीबत में काम आए। अच्छे दिनों के मित्र तो बहुत ही मिल जाते है, लेकिन जो हमारे बुरे वक्त में हमारे साथ हो, ऐसे मित्र किस्मत वालों को ही मिलते है। दोस्ती का रिश्ता विश्वास पर टिका होता है। एक मित्र का अपने मित्र पर अडिग विश्वास होता है जो पूरी उम्र मित्रता का साथ निभाता है। दोस्ती में एक दोस्त को दूसरे दोस्त को कुछ भी समझाना नही पड़ता ।एक सच्चा मित्र बिन कहे ,बिन सुने ही अपने दोस्त के मन के हाल को समझ लेता है, इसलिए इस रिश्ते को सभी रिश्तों में सर्वपरि माना जाता है। सच्चे दोस्तो से ही जिंदगी गुलजार रहती है और इसमें आनंद बना रहता है। ये दोस्ती की दौलत ऐसी होती है जो देने से बढ़ती है जिसे कोई चुरा नही सकता।

अपने जीवन में बहुत से दोस्त बनाते है, हमारे दोस्त बचपन से ही जब हम 3 या 4 साल के होते है बनने शुरू हो जाते है, जब हम उनके साथ खेलते है, मस्ती करते है, अच्छा लगने लगता है, कभी कभी हम उनसे छोटी छोटी बातों पर लडा़ई भी कर लेते है, लेकिन फिर से एक होकर खेलने लगते है, उनमें से बहुत से दोस्त हम से अलग हो जाते है, और बहुत से दोस्त हमारे साथ एक ही स्कूल मे एडमिशन लेते है, उनके इलावा हमारे और भी दोस्त स्कूल में बन जाते है, जिनके साथ रहकर हमें अच्छा लगने लगता है, जैसे जैसे हम कक्षाएँ और स्कूल को बदलते है, वैसे ही हमारे और भी दोस्त बन जाते है, कुछ दोस्त जो हमेशा साथ रहने का वादा भी करते और कुछ बस अपने मतलब के लिए ही हम से दोस्ती करते है।

दोस्ती हमारी हमेशा अन्जान लोगो से ही नही ब्लकि हमारे परिवार के सदस्यों से भी हो सकती है, अगर वो हमे एक दोस्त की तरह और हम उनसे एक दोस्त की तरह सब बाते शेयर करते है, दोस्ती हमेशा ही बलिदान और भरोसे और एहसास पर टिकी होती है, दोस्ती मे कभी रंग को नही देखा जाता है, दोस्ती मे बस दिल को देखा जाता है और परखा जाता है दोस्त को क्या वो हमसे दोस्ती निभा भी सकता है या नही, दोस्ती का उदाहरण आज भी श्री कृष्ण और सुदामा का दिया जाता है कि कैसे महलो मे रहने वाले कृष्ण ने अपने बचपन के निर्धन दोस्त को अपने राज्य के लोगो के सामने गले लगाया था, वही से कृष्ण और सुदामा की दोस्ती हमेशा के लिए अमर हो गई थी, और यही दोस्ती मे देखा जाता है कि क्या हमारा दोस्त जरूरत पड़ने पर हमारे साथ खडा़ होता है या नही, दोस्ती करनी आसान होती है और निशानी मुश्किल ऐसा हमे हर एक किताब मे पड़ने को मिल सकता है, और दोस्ती के लिए वैसे तो सभी दिन ही स्पेशल होते है लेकिन फिर भी हर वर्ष अगस्त माह के पहले रविवार को मित्रता दिवस मनाया जाता है, इस दिन दोस्त एक दूसरे को मित्रता दिवस की शुभकामनाएँ देते है और गिफ्ट भी देते है।

Dosti Par Nibanh 1000 Words Mein


प्रस्तावना

वैसे तो इस जिन्दगी में हमारे बहुत से रिश्ते होते है, जिन्हें हम बखूबी निभाने का संकल्प लेते है, और ये सब रिश्ते हमारे पहले से ही तय आते है, चाहे वो रिश्ता माँ-बाप का हो, भाई-बहन का हो, यहा तक कि चाहें पति-पत्नी का रिश्ता हो, सभी को भगवान बनाकर भेजते है, लेकिन एक रिश्ता है जो हम स्वयं अपनी जिन्दगी में बनाते है, और उस रिश्ते को दोस्ती का नाम दिया जाता है, दोस्ती दो अन्जान लोगों के बीच होती है, धीरे धीरे दो अन्जान व्यक्ति एक-दूसरे को जानने लगते है, और जान पहचान जैसे जैसे हमारे अन्य रिश्तों तक पहुँचाने लगती है, तब ये दोस्ती और भी गहरी होती चली जाती है।

मित्रता का महत्व

मित्रता का महत्व बहुत बड़ा होता है। यह रिश्ता दुनिया भर के सभी रिश्तों में सबसे ख़ास होता है। मित्र तो वैसे सबके होते है लेकिन एक अच्छा और सच्चा मित्र मिलना बहुत ही कठिन होता है और वो किस्मत वालों को ही मिलता है। ज़िन्दगी के हर मोड़ पर वो हमारे साथ खड़ा रहे और हम भी उसके साथ हमेशा खड़े रहे, यही होती है सच्चे मित्र की निशानी। एक सच्चा मित्र हमारे जीवन की हर गलतियों को सुधार देता है। हमें निराशा भरे जीवन से निकाल कर, हमें ढेर सारी खुशियाँ देता है। यही होता है सच्ची मित्रता का महत्व, भले ही दोनों में खून का सम्बन्ध न हो या जातीय सम्बन्ध न हो और न ही इंसानी, भावनात्मकता का सम्बन्ध लेकिन उससे अवश्य जुड़ा हुआ हो।

दोस्ती क्या है

दोस्ती एक एहसास है, दोस्ती एक विश्वास है, दोस्ती एक प्यार है, दोस्ती कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ों के खुले हुए कुछ राज़ है। यह रिश्ता अपने आप में ही बहुत ख़ास होता है। कभी रूठना, कभी एक दूसरे को मनाना, कभी सुख-दुःख में एक-दूसरे के काम आना। दोस्ती में कभी हसना और कभी अच्छी-बुरी बातों को सहन कर जाना। दोस्ती में न अमीरी देखी जाती है न ही गरीबी। यह हमेशा दिल के करीब होती है। यह एक हसीन लम्हें की तरह है जो कभी मिर्ची सी तीखी और कभी मिठाई की तरह मीठी होती है। दोस्ती जज़्बात सी होती है जो टूट जाने पर तड़पती है। दोस्ती सब कुछ होती है, उस इंसान के लिए, जो दोस्ती की कीमत जानता हो। इस जग में दोस्ती करना तो आसान है, पर सच्चा दोस्त वही है जिसे दोस्ती निभानी आती हो। दोस्ती कोई शर्त के हिसाब से नही की जाती बल्कि शर्त दोस्ती निभाने की होनी चाहिए।

बचपन की दोस्ती

हमारे दोस्त बनाने की प्रक्रिया बचपन से शुरू हो जाती जब हम तीन या चार साल के होते जब हम बोलना सीखते नाम लेना जानते, तब हमारे आस पड़ोस में भी कुछ हमारी ही उम्र के बच्चे होते है, जिनके साथ हम खेलना पसन्द करते, जिनके घर में जाकर या कभी हम तो कभी वो हमारे घर में आकर खेलते है, यही दोस्त हमारे बचपन के दोस्त होते है, और इन्हीं से हमारी दोस्ती की शुरुआत होती है।

स्कूल व कॉलेज के दोस्त

जब हम पहली बार स्कूल जाते है वहाँ नए-नए सहपाठियों संग मिलते है, उनसे दिन प्रतिदिन बातें बढ़ती है और फिर कई लोगों से मित्रता हो जाती है, स्कूल में हमें बहुत से नये दोस्त मिलते है जिनसे हम पहले कभी परिचित नही थे, उनमें से कुछ ही हमारे दोस्त बनने के लिए जरुरी होते है। स्कूल के बाद हम कॉलेज मे प्रवेश करते है और जहा हम फिर से एक बार नये चेहरों से परिचित होते है। उनमें से कुछ हमारी जिन्दगी में हमेशा के लिए शामिल हो जाते है, कॉलेज में हम लगभग 17 से 18 वर्ष की उम्र में परिवेश करते है, तब तक हमें लोगों की पहचान करनी आ चुकी होती है कि हमारे लिए कौन सा दोस्त अच्छा है, और किसके साथ हमारी लड़ाई होती रहेगी या कौन हमारा साथ हमेशा देगा। इस उम्र में हम घर में माँ बाप से भी कुछ बाते शेयर करने लग जाते और वो भी हमे एक दोस्त की ही तरह ट्रीट करने लगते है।

मित्रता के रूप

कॉलेज के बाद हम अपने अपने जीवन में आगे बढ़ने का फैसला कर कही ना कही नौकरी ,अपना बिजनेस, बाहर किसी फैक्टरी मे जाँब करने लग जाते है, जहा पर भी हम नये दोस्त बना लेते है, और अपने जीवन में आगे बढ़ने लगते है। ये दोस्ती ही एक ऐसा अहसास है जो हमें कभी नहीं छोड़ती। हमारे जीवन में किसी भी रूप में रहती है, जैसे:
पति या पत्नी के रूप में दोस्त: जब हमारी शादी हो जाती है, तो बचपन के, स्कूल के और कॉलेज के दोस्तों से भी ज्यादा समझने और विश्वास वाला दोस्त आता जिसे हम अपनी पत्नी या पति के रूप में स्वीकार करते है।
सोशल साइट के दोस्त: आज की भाग दौड़ वाली जिन्दगी में भी हम अपना कुछ समय सोशेल साइटस के लिए निकाल लेते है और जहा हम अनगणित लोगों से दोस्ती कर सकते लेकिन फिर भी हम कुछ चुनिंदा लोगों का चुनाव कर अपनी जिंदगी में शामिल करते है।
ईश्वर के रूप में दोस्त: हमारा मित्र कोई भी बन सकता है चाहें वो हमारे आराध्य क्यों न हो। कई व्यक्ति ईश्वर से भी मित्रता करते है। वे सभी ईश्वर से अपने दिल की बात करते है, उन्हें अपना मानते है, उनसे अपने सुख-दुःख साझा करते है। हमारा ईश्वर के प्रति ये अनोखा प्रेम मित्रता कहलाती है।
पालतू जानवरों के रूप में दोस्त: पालतू जानवर सबसे अनोखे और बिना भेद-भाव किये हमारे मित्र बन सकते है। एक वफादार जानवर चाहें वह कुत्ता हो, बिल्ली हो या अन्य कोई और, अपने मालिक को कभी अकेला नही छोड़ता। वह एक सच्चे मित्र की तरह हरदम साथ देता है।

दोस्ती को दर्जा

हमारे समाज में बहुत से लोग दोस्ती को भी गलत नजरों से देखते है और उन्हें एक दर्जा देने की कोशिश करते है, लेकिन दोस्ती तो सबसे ऊँची होती है इसका वर्णन हमें हमारे ग्रंथों में भी मिलता है, और इसका जब भी उदाहरण दिया जाता है तो श्री कृष्ण और सुदामा की दोस्ती, श्री राम और सुग्रीव की दोस्ती का वर्णन जरूर किया जाता है, ऐसे और भी उदाहरण  हमें देखने को मिलते है।

उपसंहार

फ्रेंडशिप एक ऐसा रिश्ता होता है जिसे हम कोई और रिश्ते से तोल नही सकते। यह बिना जात पात करे, बिना अमीरी गरीबी देखे, बिना रंग भेद के, की जाती है, वही दोस्ती कामयाब होती है जहा हम कभी पैसो को लेकर नही आते है, दोस्ती में हम अपनी हर बात शेयर कर सकते है, दोस्ती किसी भी उम्र के लोगों के साथ, किसी से भी लड़का हो या लड़की, हम कर सकते है, ये एक विश्वास और प्यार का रिश्ता होता है और हमें इसी विश्वास और प्यार के साथ पूरी ज़िन्दगी इस रिश्ते को निभाना होता है।

हमें आशा है कि आप सबको यह Essay on Friendship in Hindi अवश्य पसंद आया होगा, हमने यह लेख बहुत ही सरल भाषा उपयोग कर आपके समक्ष प्रस्तुत किया है ताकि हमारे विद्यार्थीगण व अन्य पाठक इसको आसानी से समझ सकें। अगर आपको यह अच्छा लगा हो तो इसे शेयर अवश्य करदें, हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध सोशल मीडिया आइकॉन के जरिये।

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