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Wednesday, September 16, 2020

प्रकृति पर निबंध | Essay on Nature in Hindi

'प्रकृति' धरती माँ का दिया एक अनमोल तोहफ़ा है, जिसमें हम मनुष्य और अन्य जीव-जंतु जीवन यापन करते है। प्रकृति के बिना हम कुछ भी नही, यह हमारी मित्र समान है। प्रकृति से ही हमें पीने का पानी, शुद्ध हवा, जीव-जंतु, पेड़-पौधे, अच्छा भोजन और रहने को घर मिलता है, जिससे मनुष्य एक अच्छा और बेहतर जीवन यापन कर पाता है। अगर यही जीवन यापन करने वाली प्रकृति न हो तो हम मनुष्यों और अन्य जीव-जंतुओं का अस्तित्व न रहे। लेकिन आज का आधुनिक मनुष्य हमारी प्रकृति को बहुत ही साधारण और तुच्छ समझने लगा है। मनुष्य लगातार प्रकृति का शोषण कर अपना ही अस्तित्व को खतरे में डाल रहा है।

आज हम आपके समक्ष शेयर करते है कुछ प्रकृति पर निबंध, इस लेख के जरिये हमने प्रकृति और मनुष्य के बीच मित्रता का महत्व, इसका शोषण और इसके संरक्षण पर विचार व्यक्त किया है।

प्रकृति पर निबंध | Essay on Nature in Hindi


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Essay on Nature in Hindi

Essay on Nature in Hindi in 200 Words


ब्रह्मांड मे कितने ही ग्रह और उपग्रह है, उन्हीं मे से है एक है पृथ्वी और पृथ्वी पर मानव जीवन संभव है, क्योकि मानव के जरूरत की सब वस्तुऐ पृथ्वी पर है, और इसी पृथ्वी की देन है हमे पकृति जो कि हमारे चाँरो ओर है,, और पकृति के इतने सुंदर नजारे है कि हम लोगो का उन नजारो को देखकर ही मन प्रसन्न हो जाता है।

प्रकृति हम मनुष्यों को निरंतर अपने असीम संसाधनों की पूर्ती करती है और सदा करती रहेगी, उससे अच्छी मित्र हम मनुष्यों की और कौन हो सकती है। यह हमें स्वच्छ हवा, पीने योग्य पानी, भोजन, रहने के लिए धरती और कई अन्य वस्तुएँ प्रदान करती है। प्रकृति में वह भी शक्ति होती है जो शरीर से कई बीमारियों को दूर कर देती है जैसे हरियाली से तनाव कम होता है और मन को शांति मिलती है। यही कई सारी विशेषताएँ है जो हमारी प्रकृति को सुन्दर बनाती है।

ईश्वर ने प्रकृति में उपलब्ध सभी चीज़ों का निर्माण मनुष्य के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किया है। परन्तु आज मनुष्य अपनी ही प्राकृतिक संपदा को क्षति पहुँचा रहा है। हम ज्यादा पेड़ लगाने की बजाए काटते है। जिसके कारण मानसून समय पर नही आता और गर्मी हर वर्ष ही बढ़ती जा रही है,, हम नहरो व नदियो को स्वचछ रखने की बजाए उनमे ना जाने कितने तरह कूढा़ कर्कट डालकर जल प्रदूषित कर रहे है, हमारी जनसंख्या बढ़ने के कारण जमीन के लिए जंगल को काटना पड़ना है, ताकि हमारा जीवन यापन आसान हो सके, हमारे साधन (कार, मोटरबाइक्स,हमारी फैक्टरीयों से निकलने वाला धुआँ) वायु प्रदूषण के बढ़ने का कारण बनता है। हम पकृति के साथ साथ अपने शरीर को भी बहुत से रोगो मे घेर लेते है जब हम ऐसा करते है, इसलिए जो भी हमे पकृति की तरफ से उपहार मिला उसको साफ व स्वचछ रखना चाहिए।

प्रकृति पर निबंध 400 शब्दों में


इस दुनिया में सबसे ज्यादा देखने योग्य कोई चीज है तो वो प्रकृति है, प्रकृति हमारे जीवन में अपना बहुत प्रभाव डा़लती है, प्रकृति के नजारें कितने सुन्दर व अद्भुत होते है, सुन्दर सुन्दर पेड़ पौधे, वन, कल-कल करती नदियाँ, हिमालय पर्वत, झरनों से गिरता पानी, मीठी मीठी ठंडी ठंडी हवाएँ, सूर्य का प्रकाश, चाँद की चाँदनी, तारों से भरा आसमान सब प्रकृति की ही तो देन है।
प्रकृति ने हमें पशु-पक्षी, पहाड़ों से भरी पर्वत श्रृंखलाएं और तारों का टिमटिमाना कितने सुन्दर लगते है। वो बारिश के बाद आसमान में बना इंद्रधनुष कितना सुन्दर नजर आता है। ये सब प्रकृति ने ही तो हमें दिया है।

पेड़ पौधों से हमें समय समय पर फल, फूल व छाया मिलती है। प्रकृति ने हमें नदियाँ दी जिन्हें हम पवित्र भी मानते है, इन्हीं नदियों का पानी जब नहरों में आता है तब गाँवों के किसान उसी पानी का प्रयोग कर हमारे लिए फसल उगाते है, और नहरों का पानी फिल्टर कर हम पीने के प्रयोग मे भी लाते है। पहाड़ों की सैर पर जाना किसे अच्छा नही लगता है, वन जहा हमें हर तरह के पेड़ पौधे व झड़ी बेटियोँ वाले पौधे मिलते जिनसे हमारे लिए दवाइयाँ बनाने का काम किया जाता है।

प्रकृति को आज हम सब मिलकर नष्ट करने को लगे हुए है, हम पेड़ पौधों को काटते जा रहे है, जिसके कारण मानसून देरी से आता और ज्यादा गर्मी बढ़ती जा रही है। जनसंख्या लगातार बढ़ रही है और उनके साथ साथ सड़कों पर दौड़ते वाहन भी जिनसे निकलते धुएँ से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। नहरों का पानी भी हम आजकल दूषित करते  जा रहे है। पहाडों को काटकर हम सड़कों का निर्माण कर रहे है और हम प्रकृति को अच्छे से नष्ट कर रहे है।

प्रकृति का हमारे जीवन व हमारे मन पर बहुत प्रभाव पड़ता है, पकृति ने हमे न जाने कितने ही तरह के पेड़ पौधे दिए, जो हमें फल, फूल और तरह-तरह की जड़ीबूटियाँ देते है, जरूरत पड़ने पर हम पेड़ों को काटकर लकड़ी के रूप मे ही प्रयोग कर लेते है, पेड़ कागज बनाने के काम में भी प्रयोग किए जाते है, पेड़ हमें गर्मी मे छाँव देते है, पेड़ों से ना जाने हमें कितने ही तरह की जड़ी बूटियाँ मिलती है, जो हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी होती है।

Prakriti Par Nibandh in 1000 Words


प्रस्तावना

ये प्रकृति ही धरा पर सम्पूर्ण जीवों के जीवन का आधार है। बिना इसके तो हम जीवन की कल्पना ही नही कर सकते । उस प्रकृति में आकाश से पाताल तक जितनी भी चीजे ईश्वर द्वारा निर्मित है सभी इसके अंतर्गत आती है। ईश्वर जिसने इस प्रकृति का निर्माण किया है वो इससे अलग नही है बल्कि वो तो इसके कण -कण में समाया है और हर चीज में व्याप्त है। या हम कह सकते है ईश्वर ही प्रकृति है और ये प्रकृति ही ईश्वर है। प्रकृति शब्द कोई छोटी-मोटी चीज नही ये बहुत ही व्यापक है।

प्रकृति का सौंदर्य

प्रकृति और इसका सौंदर्य हमेशा से मनुष्य के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। हरियाली से भरी प्रकृति बहुत ही शोभायमान प्रतीत होती है। हरी-भरी प्रकृति में रंग-बिरंगे सुंदर पुष्प हमारे मन को मोह लेते है। खेतों में लहराती फसलों से भी प्रकृति का अलग नजारा रहता है। वो रोज सुबह होना, सूर्योदय होना और किरणों को फैलना, वो आसमान में पंक्षियों का उड़ना, शाम को वो सूरज के ढलने के बाद तारों का टिमटिमाना और चाँद का चमकना ये सब प्रकृति के अद्भुत नज़ारे हैं जिनके सौंदर्य की तुलना करना मुश्किल है। मौसम का बदलना, वो पतझड़ के मौसम के बाद बसन्त का आना और धरती को हरियाली से सजाना ये सब कितना अद्भुत है। ये पहाड़, नदी, तालाब, सागर और झरनों का कल-कल बहना, इन सबको देख कर ऐसा लगता है जैसे स्वयं ईश्वर इन सभी के कण कण में समाया है। ये सौंदर्य से परिपूर्ण प्रकृति जो ईश्वर ने हमे दी है इसके सौंदर्य का कोई सानी नही है।

प्रकृति एक शिक्षक के रूप में

प्रकृति केवल एक दर्शनीय वस्तु नही है। प्रकृति हमें जीवन में ज्ञान प्रदान करती है। हम प्रकृति के साथ रह कर उससे बहुत कुछ सीख सकते है। प्रकृति हमें एक सच्चे गुरु की तरह हमारा मार्ग दर्शन करती है। प्रकृति में विद्यमान जितनी भी चीजें हैं वो हमारे लिए ज्ञान का स्रोत्र है। प्रकृति एक माँ के समान है। जिस प्रकार माँ अपनी संतान को अपनी गोद में रखती है उसी प्रकार ये प्रकृति भी सभी प्राणीयों को अपनी प्राकृतिक गोद में रखकर उसका लालन पोषण करती है। हमारे अंग्रेजी कवि विलियम वर्ड्सवर्थ ने कहा है कि प्रकृति बुद्धिमता और नैतिकता का स्रोत्र होती है। प्रकृति मनुष्य के व्यवहार पर बहुत ही गहरा प्रभाव छोड़ती है। लेकिन इस आधुनिक युग में मनुष्य बहुत ही वैज्ञानिक हो गया है, जिससे वो प्रकृति से धीरे-धीरे दूर होता चला जा रहा है जिससे उसकी मानसिकता में परिवर्तन आ गया है, लेकिन चाहे जो हो मनुष्य को मानसिक और आत्मिक शांति प्रकृति से ही मिलती है। क्योंकि विज्ञान हमें व्यवहारिक ज्ञान नही देता, इसकी शिक्षा तो हमें प्रकृति से ही प्राप्त होती है।

प्रकृति कवियों के आकषर्ण के केंद्र के रूप में

प्रकृति सदियों से ही कवियों की कविताओं का केंद्र बिंदु रही है। प्रकृति के अद्भुत नजारे, पेड़-पौधे, धरती-आकाश, नदी व झरने आदि सदा कवियों को आकर्षित करते रहे है। कवियों ने अपनी-अपनी कविताओं में प्रकृति को नए नए रूपों में प्रस्तुत किया है और अपनी अद्भुत कलाओं से इसे और ही अंलकृत कर दिया है। कवि प्रकृति में स्वयं को खोजता है और इसके हर रूप में वो स्वयं को ही पाता है। शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि केवल कवि ही ऐसा होता है जो किसी भी चीज का गहनता से अध्ययन करता है। कवि प्रकृति को अपनी कविताओं में इसको इतने सुंदर तरीके से प्रस्तुत करता है कि प्रकृति का सौंदर्य और भी जीवंत हो उठता है। कवियों की रचनाओं में प्रकृति को देख कर ऐसा लगता है जैसे अगर ये प्रकृति न होती तो कवि की कविता इतनी सुंदर न होती।

प्रकृति का महत्त्व

प्रकृति मानव जीवन के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। बिना प्रकृति के धरती पर मानव का जीवन संभव नही है। प्रकृति में ही हमारा जन्म और पालन-पोषण होता है। मनुष्य का हर क्रिया कलाप बिना इसके असंभव है। मनुष्य का शरीर जल, अग्नि, मिट्टी, आकाश और वायु से बना है जो प्रकृति के अंश है और ये पंच तत्व ही धरती पर जीवन का आधार है। प्रकृति का महत्त्व केवल इसलिए नही है कि वो हमें जीवन देती है, बल्कि ये इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि हमें एक शिक्षक की भांति ज्ञान प्राप्त कराती है और एक माँ के समान हमारा लालन-पालन करती है। ये प्रकृति हमारी मित्र भी है, क्योंकि एक मित्र की भांति ही ये हमारे सुख-दुख दोनों में हमारा साथ निभाती है और ये एक सच्चे मित्र की तरह ही हमारा उचित मार्ग दर्शन करती है।

प्रकृति का संरक्षण

जिस प्रकार ये प्रकृति हमें जीवन प्रदान करके हमारा पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार इस प्रकृति को भी संरक्षण की आवश्यकता होती है। लेकिन वर्तमान युग में मनुष्य की आवश्यकताएँ असीमित हो गयी है  जिससे वो प्रकृति का अनावश्यक रूप से अधिक से अधिक दोहन करता चला जा रहा है। मनुष्य प्रतिदिन अपने क्रियाकलापों से प्रकृति को दूषित और नष्ट कर रहा है जिसके कारण इसका अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है। लेकिन मनुष्य को चेतना पड़ेगा और प्रकृति के संसाधनों को उचित उपयोग करना होगा जिससे आने वाले समय में प्रकृति के संसाधनों की उपलब्धता और गुणात्मकता बनी रहे और हमारा आने वाला कल सुरक्षित हो। अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए हर एक मनुष्य को प्रकृति का संरक्षण करना होगा, और समाज में लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करना होगा।

उपसंहार

इस प्रकार हम देखते है कि ये प्रकृति मानव के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। अगर धरती है पर जीवन है तो केवल प्रकृति के कारण ही। बिना प्रकृति और प्राकृतिक वातावरण के ये संसार वीरान हो जाएगा। 'प्रकृति' ईश्वर का दिया गया एक अनमोल तौफ़ा है और हम मनुष्यों का कर्तव्य बनता है कि हम उस तौफ़े की हिफाजत करें और सही से रखे। प्रकृति हमें जीवन पर्यंत कुछ न कुछ देती रहती है और बदले में हमसे कुछ नही चाहती। लेकिन हमें स्वयं में जागरूक होना चाहिए। अगर हम चाहते है वे प्रकृति और इसकी प्राकृतिक सौंदर्यता युगों-युगों तक बनी रहे तो हमें इसकी रक्षा करनी होगी।

हमें आशा है कि आप सबको यह Essay on Nature in Hindi अवश्य पसंद आया होगा, हमने यह लेख बहुत ही सरल भाषा उपयोग कर आपके समक्ष प्रस्तुत किया है ताकि हमारे विद्यार्थीगण व अन्य पाठक इसको आसानी से समझ सकें। अगर आपको यह अच्छा लगा हो तो इसे शेयर अवश्य करदें, हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध सोशल मीडिया आइकॉन के जरिये।

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